चाय और तुम्हारी याद



आज घर लौटते हुए रस्ते में चाय की वही दुकान दिखी, जहाँ हमने आखिरी बार चाय पी थी साथ में.. सोचा कि ठहर के चाय की चुस्कियों में उस अहसास को दुबारा से जी लूँ, फिर तुरंत ही खुद की बेवकूफी का ख्याल हो आया, भला वो भी कहीं संभव था.. तुम्हारे साथ के अहसास को तुम्हारे बिना कैसे जिया जा सकता था.. सो आ गयी वापिस तुम्हारे साथ के उस गुज़रे अहसास को याद करते हुए... मैं अभी भी अपनी आँखों में नमी महसूस कर रही हूँ| सच कहूँ, यादें हर दफ़ा खुशी नहीं देतीं...

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