अब शायद छूट चली है तुम्हारी आदत
जल्दी सोने की
तुम्हारे शब्द,
तमाम कोशिशों के बाद भी जिन्हें भूल नहीं पाई,
आज भी बजते हैं मेरे कानों में
हौले से कहते हुए
"तुम मेरी आदत हो खूबसूरत, जिसे कभी छोड़ा नहीं जा सकता"
खूबसूरती,
उस आदत की
खत्म हो चली थी..
आदतों का छूट जाना इस तरह,
काफी अच्छा होता है न..
छूटी नहीं मगर मेरी आदत,
तुम्हारे इंतज़ार की
आदतों को भी मालूम हैं यों तो,
कि ये इंतज़ार इंतज़ार ही रहेगा..
फिर भी मेरी आदत और ये इंतज़ार,
मिलते हैं हर रोज़
जाने किसी उम्मीद में या कि
बस हो मजबूर
अपनी आदतों से..!!


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