She is Married not Dead
बीते दिनों एक डॉक्यूमेंट्री देखी थी - She is Married not Dead - इसे बनाया है Pranay Manjari ने। प्रणय मंजरी से परिचय कुछ समय से है। इस डॉक्यूमेंट्री का ज़िक्र जब से सुना था तबसे इस काम को देखना चाह रही थी। हाल में जब यह यू ट्यूब पर अाई तो तुरंत देख ली। 15 मिनट की यह छोटी सी फिल्म एक बड़ी बात कहती है। यह फिल्म बात करती है स्त्रियों को लेकर हमारे समाज की मानसिकता के बारे में, जहां बहुत प्यार से लड़के वाले कहते हैं कि बधाई हो! आपकी बेटी अब हमारी हो गई। मुझे यह वाक्य ही बहुत problematic लगता है। पर यहां तो इस समस्या को सेलिब्रेट किया जाता है। लड़कियां अपना सरनेम शादी के अगले दिन ही बदल देती हैं। स्त्रियां अपने परिवार एक मेहमान लिए तरह ज़रूरी मौकों पर उपस्थिति दर्ज कराने जाती हैं। अपने पति के परिवार की ज़िम्मेदारी को निभाते निभाते खुद अपना जीवन ही भूल जाती हैं। मैंने कई परिवारों में तो पाया है कि शादी के बाद उनका एक और नाम रखा जाता है। गैर बराबरी के इस पूरे प्रोसेस को हम खूब जश्न के साथ मनाते हैं।
प्रणय की यह डॉक्यूमेंट्री इसी गैर बराबरी के एक पहलू को दिखाती है। जब मैं यहां एक पहलू कहती हूं तो वो इसलिए क्योंकि इस गैर बराबरी में मुझे बहुत सारे लेयर्स दीखते हैं। प्रणय की यह डॉक्यूमेंट्री कुछ वास्तविक किरदारों के जीवनानुभव के मार्फत से यह बात रखती है कि शादी के बाद भी स्त्री का जीवन उसका ही जीवन होता है। यह ज़रूर है कि उसके परिवार का घेरा बड़ा हो जाता है बजाय इसके कि उनका परिवार, उनका पता ही बदल जाए।
इस फिल्म के किरदारों में अलग अलग सामाजिक स्टेटस के किरदार है। यहां यह कहना ज़रूरी इसलिए था कि हम इस समस्या को किसी खास श्रेणी या समाज का न मान लें।
प्रणय इस फिल्म पर बात करते हुए एक जगह पर कहती हैं कि उन्होंने अपनी बात कहने से पहले बहुत सोचा क्योंकि जो चीज उन्हें गैर बराबरी लग रही थी, उसे उनके आस पास की महिलाएं बिना शिकायत के स्वीकार कर जी रही थी। प्रणय इस मसले पर लंबे समय तक सोचती रहीं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि दिक्कत उनके साथ है। और वे इस नतीजे पर पहुंचती हैं कि यह दिक्कत बहुत बड़ी गैर बराबरी का नतीजा है और इस पर बात होनी ही चाहिए। पाश कहते हैं न 'हम लड़ेंगे साथी जब तक लड़ने की जरूरत बाकी है'। तो आइए प्रणय की इस लड़ाई में हम भी उनके साथ खड़े हों क्योंकि दर असल यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं है बल्कि अपने समाज को सुंदर बनाने के लिए है और यह भी तो सच है न कि 'लड़े बगैर कुछ नहीं मिलता'।
प्रणय और उनकी टीम को खूब बधाई!!


बिल्कुल सही
जवाब देंहटाएंजब तक खुद स्त्री इस दायरे से बाहर नहीं आएगी, वह किसी भी घर की नहीं हो पाएगी ।