इन दिनों...!!


इन दिनों
सपने उदास रहते हैं
बारहाँ कोशिशें कीं
उन उदासियों को दूर करने की
कोशिशें तमाम ज़ाया हुईं
दे न सकी मुस्कुराहटें उन्हें
सपने,
नाराज़ हैं मुझसे
औ मैं खुद से
कि दे न सकी मुहब्बत
उन सपनों को
जिन्होंने सिखाया था कभी
करना मुहब्बत ज़िन्दगी से
वह सबक भूल बैठी थी,
तभी
सपने उदास रहते हैं

इन दिनों...!!

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